कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण पिछले काफी दिनों से खेल गतिविधियां ठप पड़ी है, हालांकि अब कुछ देशों में फुटबॉल, गोल्फ जैसे खेल खेलने की अनुमति मिल गई है। इस महामारी की वजह से क्रिकेट लेकिन अभी तक ठप पड़ा है। पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही है कि क्रिकेट की दोबारा वापसी के दौरान लार और पसीने पर बैन लगाया जाए ताकी खिलाड़ी इस बीमारी से दूर रह सकें। इसके बदले आईसीसी गेंद को चमकाने के लिए किसी अन्य चीज का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है।
आईसीसी के इस विचार से कुछ खिलाड़ियों ने सहमति जाताई है तो कुछ खिलाड़ियों का कहना है कि गेंदबाजों के लिए यह नाइंसाफी है। वहीं हाल ही में ऑस्ट्रेलियाई पूर्व लेग स्पिनर शेन वॉर्न ने गेंद को एक तरफ से भारी बनाने की सलाह दी थी। वॉर्न ने कहा था कि ‘‘गेंद को एक तरफ से भारी क्यों नहीं बनाया जा सकता ताकि ये हमेशा स्विंग लें। यह एक टेप लगाई हुई टेनिस गेंद या लॉन बॉल की तरह रहेगी।’’
वॉर्न के इस सुझाव से भारतीय पूर्व तेज गेंदबाज चेतन शर्मा ने असहमति जताई है। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में चेतन ने कहा, 'मुझे लगता है कि हम मामले को ज्यादा पेचीदा बना रहे हैं। क्रिकेट को जैसा है वैसा ही रहने दें। इसे सर्कस न बनाएं। मेरे विचार से जब यह महामारी खत्म होगी क्रिकेट फिर वहीं से शुरू होगा। अगर किसी मैच में खेल रहे सभी क्रिकेटर नेगेटिव मिलते हैं तो फिर क्या समस्या है? यही एक तरीका है। खेल में ज्यादा बदलाव की जरूरत नहीं है।'
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उन्होंने कहा, 'गेंद पर लार या पसीना ना लगाने की यह बहस अव्यवाहारिक है। अपने होंठों और माथे को हाथ लगाना इंसानी स्वभाव का हिस्सा है। इसी तरह जब आप गेंद को छूते हैं, उस पर आपका लार और पसीना होगा। जब आपका मुंह सूख जाता है या आप पानी पीते हैं तो क्या अपने मुंह पर हाथ नहीं लगाते? इससे बचा नहीं जा सकता।'
उन्होंने कहा, 'गेंद की चमक से स्पिनर्स को ड्रिफ्ट हासिल करने में मदद मिलती है। अगर विकेट में टर्न है, तो कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अगर अच्छी बल्लेबाजी विकेट है तो स्पिनर्स को भी शाइन की जरूरत होती है जिससे वे बल्लेबाजों को चमका दे सकें।'
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