ढाका| बांग्लादेश के बायें हाथ के पूर्व स्पिनर मुशर्रफ हुसैन कोरोना वायरस परीक्षण में पॉजिटिव पाए गए हैं। हुसैन ने पांच एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व किया। हुसैन को पिछले साल ब्रेन ट्यूमर होने का भी पता चला था। रविवार को कोविड-19 परीक्षण का नतीजा आने के बाद हुसैन अपने घर में ही पृथकवास से गुजर रहे हैं।
‘द डेली स्टार’ ने हुसैन के हवाले से कहा, ‘‘मेरे पिता इससे पहले कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए थे और उन्हें सीएमएच अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कराया गया था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बाद में मैंने भी कुछ लक्षणों का अनुभव किया और कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया गया। मैं अब तक ठीक हूं और घर में पृथकवास से गुजर रहा हूं।’’
हुसैन ने कहा, ‘‘मेरी पत्नी और बच्चे हालांकि नेगेटिव पाए गए हैं।’’ हुसैन को उम्मीद है कि वह इस बीमारी से उबरने के बाद इस साल घरेलू सर्किट में वापसी करेंगे। पूर्व कप्तान मशरेफ मुर्तजा और दो अन्य बांग्लादेशी क्रिकेटर नजमुल इस्लाम और नफीस इकबाल जून में कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए थे। पिछले हफ्ते बांग्लादेश फुटबॉल टीम के 18 खिलाड़ी पॉजिटिव पाए गए थे।
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'B-grade actor': Matthew Hayden recalls verbal duel with Shoaib Akhtar in 2002 Image Source : GETTY
मेलबर्न| ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडन ने 2002 में शरजाह में खेले गए टेस्ट मैच में पाकिस्तान के शोएब अख्तर के साथ हुई नोंकझोंक को याद किया है। ऑस्ट्रेलियाई ने वो मैच पारी और 198 रनों से जीता था। पाकिस्तान की टीम दोनों पारियों में 100 का आंकड़ा भी नहीं छू सकी थी। पाकिस्तान ने पहली पारी में 59 और दूसरी पारी में 53 रन बनाए थे।
दूसरे टेस्ट में लगाए गए शतक के कारण 'मैन ऑफ द मैच' चुने गए हेडन ने बताया कि अख्तर ने कैसे उनसे स्लेजिंग की लेकिन अंत में वो खुद ही अपनी एकाग्रकता गंवा बैठे।
हेडन ने दे ग्रेड क्रिकेटर पोडकास्ट में कहा, "उदाहरण के तौर पर अख्तर, मैं उन्हें बी ग्रेड एक्टर कहूंगा। हम शरजाह में खेल रहे थे और तापमान 48 डिग्री होगा। हम जब मैदान पर उतरे तो अख्तर ने कहा कि आज मैं तुम्हें मार डालूंगा, उन्होंने यह काफी रंगीन भाषा में कहा। मैंने कहा कि दोस्त यह अच्छा है, मैं इस चुनौती के लिए तैयार हूं, मैंने यह और ज्यादा रंगीन भाषा में कहा।"
उन्होंने कहा, "इसलिए मैंने कहा, एक चीज है पागल, तुम्हारे पास 18 गेंद हैं ऐसा करने के लिए। आपको तीन ओवर चाहिए क्योंकि इसके बाद तुम मार्शमैलो की तरह हो जाओगे जो विमान में लंबे समय तक रहता है और दूसरे छोर पर मैं रह जाऊंगा 18 गेंद बाद उसे साफ करता हुआ।"
पाकिस्तान ने उस पारी में कुल 92.1 ओवर फेंके थे जिसमें से अख्तर ने 14 ओवर किए थे। वहीं हेडन ने 255 गेंदों पर 119 रन बनाए थे जिसमें नौ चौके और एक छक्का शामिल था।
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Indian Hockey legend Dhyanchand Image Source : TWITTER
नई दिल्ली| तारीख 15 अगस्त भारतीयों के जेहन में सर्वोच्च मुकाम रखती है क्योकि 1947 में इसी तारीख को भारत ने आजादी पाई थी, लेकिन इससे 11 साल पहले 1936 में विश्व के एक और कोने में भारतीय पताका जमकर लहराई थी। 1936 ओलम्पिक में, भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियों ने अविश्वसनीय माहौला बना दिया था, उन्होंने बर्लिन में खचाखच भरे स्टेडियम में शानदार प्रदर्शन जो किया था।
सेमीफाइनल में फ्रांस को भारतीय टीम का कहर झेलना पड़ा था खासकर, मेजर ध्यानचंद का, जिन्होंने टीम के 10 में से चार गोल किए थे। इसके बाद 15 अगस्त को भारत और जर्मनी के लिए मंच तैयार था। टीम के अंदर हालांकि माहौल तनावपूर्ण था क्योंकि उस मैच को देखने जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर आने वाला था और उनके अलावा 40,000 जर्मन लोग स्टेडियम में भारतीय खिलाड़ियों देखने वाले थे।
मैच वाले दिन ध्यानचंद ने अपना जलवा दिखाया और इसके बाद जो हुआ वो ओलम्पिक स्वर्ण पदक से भी ज्यादा मायने रखता है।
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कोच अली सिबाटियन नकवी ने आईएएनएस से कहा, "दादा ध्यानचंद थे जिन्हें हॉकी का जादूगर कहा जाता था, उहोंने जर्मनी के खिलाफ छह गोल किए थे और भारत ने यह मैच 8-1 से जीता था। हिटलर ने दादा ध्यानचंद को सलाम किया और उन्हें जर्मनी की सेना में शामिल होने का प्रस्ताव दिया।"
उन्होंने कहा, "यह पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान हुआ था और दादा कुछ देर शांत रहे, खचाखच भरा स्टेडियम शांत हो गया और डर था कि अगर ध्यानचंद ने प्रस्ताव ठुकरा दिया तो हो सकता कि तानाशाह उन्हें मार दे। दादा ने यह बात मुझे बताई थी उन्होंने हिटलर के सामने आंखे बंद करने के बावजूद सख्त आवाज में कहा था कि 'भारत बिकाऊ नहीं है'। "
उन्होंने कहा, "हैरानी वाली बात यह थी कि पूरे स्टेडियम और हिटलर ने हाथ मिलाने के बजाए उन्हें सलाम किया और कहा, जर्मन राष्ट्र आपको आपके देश और राष्ट्रवाद के प्यार के लिए सलाम करता है। उनको जो हॉकी का जादूगर का तमगा मिला था वो भी हिटलर ने दिया था। ऐसे खिलाड़ी सदियों में एक होते हैं।"
नकवी ने अपने जमाने की हॉकी और आज की हॉकी में अंतर बताते हुए कहा, भारत की मौजूदा टीम ऑस्ट्रेलियाई और यूरोपियन प्रशिक्षकों के हाथ में है और अब वह यूरोपियन स्टाइल में ही खेलने लगी है। उन्होंने कलात्मक हॉकी को बदल दिया है और मुख्य रूप से फिजिकल फिटनेस पर निर्भर हो गए हैं।"
उन्होंने कहा, "ऑस्ट्रेलियाई कोच उन्हें यूरोपियन और भारतीय स्टाइल की हॉकी सिखा रहे हैं और इसलिए वो सफल हैं लेकिन भारत की मौजूदा टीम के साथ समस्या यह है कि उनका प्रदर्शन निरंतर नहीं है। यह कुछ अहम मैचों में देखा गया है और वह अंत के पलों में मैच हार जाते हैं।"
भारत इस समय विश्व रैंकिंग में नंबर-4 पर है। नकवी के मुताबिक भारतीय टीम अगले साल होने वाले ओलम्पिक खेलों में अपना ताज वापस पाने के काबिल है।
उन्होंने कहा, "हां, मनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली युवा टीम इसकी काबिलियत रखती है। वह मेरे पसंदीदा खिलाड़ी भी हैं। ऐसी उम्मीद की जा सकती है कि टीम शीर्ष-4 में रहेगी, बाकी किस्मत।"
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भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई कप्तान हुए हैं और सबका अपना - अपना अंदाज रहा है। लेकिन जिस तरह से टीम इंडिया के पूर्व कैप्टन कूल महेंद्र सूंघ धोनी मैदान में अपने शांत व्यवहार के लिए फेमस है। वैसा कप्तान आज तक शायद ही किसी ने देखा हो। जबकि इसके विपरीत टीम इंडिया के वर्तमान कप्तान विराट कोहली मैदान में आपनी भावनाओं पर काबू नहीं पा पाते हैं और उनका आक्रामक रवैया सबके सामने आ जाता है। ऐसे में बीसीसीआई के पूर्व चयनकर्ता गगन खोड़ा का मानना है कि धोनी मैदान में शांत दिखाई देते थे तो इसका मतलब ये नहीं की वो आक्रामक कप्तान नहीं थे।
स्पोर्ट्सकीड़ा के साथ इंटरव्यू में गगन खोड़ा ने कहा,'' विराट कोहली बहुत आक्रामक हैं, लेकिन धोनी आक्रामक नहीं थे, ऐसा नहीं है। आक्रामकता वोकल नहीं होती। धोनी आक्रामक और सुरक्षित थे। आपको एक कप्तान के रूप में सुरक्षित रहना होता है।"
इस तरह 2017 से जबसे विराट कोहली ने टीम इंडिया का कार्यभार संभाला है। वो दिन प्रतिदिन अपनी कप्तानी में और मैच्योर होते जा रहे हैं। जिसको लेकर खोड़ा का मानना है कि कप्तान कोहली भी धोनी से बहुत जल्द सीख रहे हैं और उस तरह के बनना भी चाहते हैं।
खोड़ा ने आगे दोनों की कप्तानी के अंतर पर प्रकाश डालते हुए कहा, "आप हर समय हमलावर और आक्रामक नहीं हो सकते। आपको आक्रामक होने के साथ सुरक्षित भी होना होता है। धोनी के पास यह दोनों खूबियां थी। विराट कोहली उन्हीं के रास्ते पर चलकर वहां पहुंच रहे हैं। वह अपनी गलतियां स्वीकार करते हैं और अगली बार उन गलतियों को नहीं दोहराते। धोनी और कोहली में यही अंतर है कि कोहली वोकल हैं और धोनी कूल थे।''
वहीं अंत में धोनी की आक्रमकता और कूलनेस के बारे में खोड़ा ने कहा, "बहुत से ऐसे अवसर आए जब धोनी अपनी शांत प्रवत्ति के आपे से बाहर आए हैं। सही मौके पर धोनी विरोधी टीम के खिलाफ आक्रमकता दिखाने में पीछे भी नहीं रहते हैं।
बता दें कि गगन खोड़ा नवंबर 2015 से लेकर जनवरी साल 2017 तक भारतीय क्रिकेट चयनसमिति का हिस्सा रहे थे। उन्हें लोढ़ा कमिटी ने दरकिनार कर दिया था। जिसके बाद चयनकर्ताओं के पैनल में सिर्फ तीन लोग ही बचे थे।
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