महेंद्र सिंह धोनी के क्रिकेट से संन्यास लेने के अगले दिन ही बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने खुलासा करते हुए बताया कि कैसे उन्हें साल 2011 विश्वकप जिताने के बावजूद चयनकर्ता टीम की कप्तानी से हटाना चाहते थे। तब उन्होंने आगे आकर धोनी का पक्ष लिया और उन्हे टीम का कप्तान बरकरार रखा।
दरअसल, साल 2011 विश्वकप जीतने के बाद धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टेस्ट सीरीज में 0-4 से हार का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद चयनकर्ताओं का पैनल धोनी को कप्तानी से बिना किसी बैकअप के आगे आने वाली श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ट्राई वनडे सीरीज से हटा देना चाहता था। ऐसे में श्रीनिवासन ने सबके खिलाफ जाकर धोनी के टीम में बने रहने का ऐलान किया।
श्रीनिवासन ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, "साल 2011 में भारत ने विश्वकप जीता था। उसके बाद हमारी टीम ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टेस्ट सीरीज में अच्छा नहीं किया था। इस तरह चयनकर्ताओं के पैनल में से एक चयनकर्ता धोनी को वनडे क्रिकेट की कप्तानी से हटा देना चाहते थे। ऐसे में चर्चा का विषय ये था कि आप उन्हें वनडे की कप्तानी से कैसे हटा सकते हैं जबकि कुछ ही महीनों पहले उन्होंने विश्वकप जीता है। इतना ही नहीं उन्हें धोनी के रिप्लेसमेंट तक के बारे में जानकारी नहीं थी। जिसके बाद फिर मैंने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया।"
श्रीनिवासन ने आगे कहा, "मेरे ख्याल से छुट्टी का दिन था। मैं गोल्फ खेल रहा था। तभी संजय जगादले जो उस समय बीसीसीआई सेक्रेटरी थे मेरे पास आए और बोले कि सर चयनकर्ताओं ने उन्हें कप्तान बनाने से नकार दिया है लेकिन टीम में शामिल करने का फैसला किया है। उसके बाद मैं आया और मैंने कहा धोनी कप्तान रहेगा। मैंने तब बीसीसीआई के अध्यक्ष होने का फायदा उठाया।"
बता दें कि विश्वकप जिताने के बाद टीम इंडिया को अगली दोनों टेस्ट सीरीज में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। जिसमें ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाफ टीम इंडिया लाल गेंद के खेल में कहीं टिक नहीं पाई। यही कारण था कि आगे जाकर धोनी ने साल 2014 में अचानक टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया और विराट कोहली ने टीम की बागडोर संभाली।
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